स्कूल में कई बार किसी बच्चे को पढ़ने, लिखने, सुनने, देखने, बोलने या व्यवहार से जुड़ी परेशानी होती है, लेकिन समय रहते उसकी सही पहचान नहीं हो पाती। ऐसी स्थिति में बच्चे को कमजोर विद्यार्थी समझ लेना भी गलत हो सकता है।
इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए शिक्षा मंत्रालय ने PRASHAST को स्कूल स्तर पर बच्चों की शुरुआती screening के लिए विकसित किया है।
2026 में PRASHAST 2.0 के माध्यम से इस प्रक्रिया को बड़े स्तर पर लागू किया जा रहा है। इसका उद्देश्य बच्चों में संभावित विशेष जरूरतों की शुरुआती पहचान करना और जरूरत पड़ने पर उन्हें आगे assessment तथा उचित सहायता के लिए भेजना है।
इस लेख में आसान भाषा में समझेंगे कि PRASHAST App क्या है, यह कैसे काम करता है, किन बच्चों की screening होगी, शिक्षक और Special Educator की क्या भूमिका है और माता-पिता को इसके बारे में क्या जानना चाहिए।
PRASHAST App क्या है?
PRASHAST का पूरा नाम Pre-Assessment Holistic Screening Tool है।
यह स्कूलों के लिए बनाया गया एक disability screening tool है। इसकी मदद से स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों में ऐसी स्थितियों के शुरुआती संकेत पहचाने जा सकते हैं जिनके लिए बच्चे को आगे विशेष सहायता या विशेषज्ञ assessment की जरूरत हो सकती है।
PRASHAST को NCERT और शिक्षा मंत्रालय की पहल के तहत विकसित किया गया है। यह Rights of Persons with Disabilities यानी RPwD Act, 2016 में मान्यता प्राप्त 21 disability conditions को ध्यान में रखकर screening करने में सहायता करता है।
PRASHAST 2.0 क्या है?
PRASHAST 2.0 इसका नया और बेहतर रूप है।
जनवरी 2026 में आयोजित Inclusive Education Summit में शिक्षा मंत्रालय ने PRASHAST 2.0 की implementation roadmap पर विस्तार से जानकारी दी थी।
इसे बड़े स्तर पर बच्चों की शुरुआती पहचान, व्यवस्थित screening, data collection, tracking और monitoring में सहायता के लिए तैयार किया गया है। इसका UDISE+ के साथ integration भी PRASHAST 2.0 की महत्वपूर्ण विशेषताओं में शामिल है।
PRASHAST 2026 की महत्वपूर्ण तारीखें
Official PRASHAST portal पर 2026 के लिए implementation timeline दी गई है।
1 जुलाई 2026 – Mandatory Training:
Headmasters और Teachers के लिए जरूरी training पूरी करने की प्रक्रिया।
10 सितंबर 2026 – School Onboarding:
स्कूलों का platform पर registration और जरूरी details की verification।
18 सितंबर 2026 – Part-1 Screening:
Teachers द्वारा विद्यार्थियों की शुरुआती screening शुरू होगी।
2 अक्टूबर 2026 – Part-2 Screening:
Part-1 में चिन्हित विद्यार्थियों की Special Educators द्वारा अधिक विस्तृत screening।
20 अक्टूबर 2026 – Intervention Camps:
Experts द्वारा जरूरत के अनुसार सहायता, मार्गदर्शन और आगे की योजना।
9 नवंबर 2026 – Progress & Monitoring:
विद्यार्थियों की प्रगति और interventions से जुड़ी जानकारी दर्ज करना।
25 दिसंबर 2026 – Outcome Evaluation & Reporting:
विद्यार्थियों की प्रगति और intervention के परिणामों का मूल्यांकन।
इसलिए 18 सितंबर 2026 PRASHAST के वर्तमान implementation में महत्वपूर्ण तारीख है।
PRASHAST में बच्चों की Screening कैसे होगी?
PRASHAST screening को मुख्य रूप से दो भागों में बांटा गया है।
Part-1 Screening
Part-1 का इस्तेमाल regular teachers करते हैं।
शिक्षक बच्चों को रोज कक्षा, खेल के मैदान, library और दूसरी school activities में देखते हैं। इसी नियमित observation के आधार पर निर्धारित checklist की मदद से शुरुआती screening की जाती है।
इसका उद्देश्य किसी बच्चे को तुरंत “दिव्यांग” घोषित करना नहीं है।
इसका उद्देश्य केवल ऐसे संकेतों की शुरुआती पहचान करना है जिनकी आगे अधिक जांच की आवश्यकता हो सकती है।
Part-2 Screening
Part-1 में जिन बच्चों के बारे में आगे screening की जरूरत दिखाई देती है, उनके लिए Part-2 की प्रक्रिया होती है।
यह काम Special Educator द्वारा किया जाता है।
Special Educator Part-1 में teacher द्वारा की गई observations को validate करता है और आवश्यकता होने पर बच्चे को आगे assessment, identification तथा certification की प्रक्रिया के लिए refer किया जा सकता है।
क्या PRASHAST Medical Diagnosis करता है?
नहीं।
यह बात माता-पिता और शिक्षकों दोनों के लिए समझना बहुत जरूरी है।
PRASHAST diagnostic tool नहीं है। यानी केवल PRASHAST screening के आधार पर किसी बच्चे को किसी disability से ग्रस्त घोषित नहीं किया जाना चाहिए।
NCERT की official checklist में भी स्पष्ट किया गया है कि इसका उपयोग शुरुआती screening के लिए किया जाना है, diagnosis करने या बच्चे पर अनावश्यक label लगाने के लिए नहीं।
उदाहरण के लिए किसी बच्चे को पढ़ने में कठिनाई हो रही है तो केवल इसके आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि उसे Specific Learning Disability है।
PRASHAST ऐसे संकेतों को पहचानने में मदद कर सकता है, जिसके बाद जरूरत होने पर विशेषज्ञ द्वारा उचित assessment किया जा सकता है।
PRASHAST किन Disabilities की Screening में मदद करता है?
PRASHAST को RPwD Act, 2016 में मान्यता प्राप्त 21 disability conditions को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।
इसमें विभिन्न प्रकार की स्थितियों से जुड़े शुरुआती संकेतों को देखा जा सकता है, जैसे:
- देखने से जुड़ी परेशानी
- सुनने से जुड़ी परेशानी
- बोलने और भाषा से जुड़ी कठिनाई
- चलने-फिरने से जुड़ी समस्या
- Specific Learning Disability
- Autism Spectrum Disorder
- बौद्धिक विकास से जुड़ी स्थितियां
- मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी कुछ स्थितियां
- एक से अधिक disabilities से जुड़ी जरूरतें
यह पूरी medical diagnosis list नहीं है। Screening के बाद आवश्यकता होने पर उचित professional assessment जरूरी हो सकता है।
Dyslexia की पहचान में PRASHAST कैसे मदद कर सकता है?
कुछ बच्चे सामान्य रूप से समझदार होने के बावजूद पढ़ने, spelling लिखने या शब्द पहचानने में लगातार कठिनाई महसूस कर सकते हैं।
ऐसी समस्या को केवल “बच्चा पढ़ाई में कमजोर है” कहकर नजरअंदाज करना उचित नहीं है।
शिक्षा मंत्रालय ने Specific Learning Disabilities, जिसमें Dyslexia भी शामिल हो सकता है, की शुरुआती पहचान में PRASHAST 2.0 की भूमिका पर विशेष जोर दिया है।
स्कूल स्तर पर शुरुआती संकेत मिलने के बाद बच्चे को जरूरत के अनुसार आगे assessment और learning support मिल सकता है।
Teachers की क्या भूमिका होगी?
PRASHAST में teachers की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि वे बच्चों के साथ लंबे समय तक रहते हैं और उनके व्यवहार तथा सीखने के तरीके को अलग-अलग परिस्थितियों में देख सकते हैं।
Part-1 में regular teacher निर्धारित checklist के आधार पर बच्चों को observe करता है।
इसके बाद जरूरत पड़ने पर Special Educator Part-2 screening करता है।
यानी teacher का काम medical diagnosis करना नहीं, बल्कि संभावित जरूरतों को समय रहते पहचानने में सहायता करना है।
Parents को क्या करना होगा?
अगर स्कूल आपके बच्चे की PRASHAST screening के संबंध में जानकारी देता है तो घबराने की जरूरत नहीं है।
Screening में कोई संकेत मिलना अपने आप में final diagnosis नहीं है।
माता-पिता को:
- स्कूल से पूरी जानकारी लेनी चाहिए।
- Teacher और Special Educator से बच्चे की observations समझनी चाहिए।
- जरूरत होने पर उचित विशेषज्ञ assessment करवाना चाहिए।
- बच्चे को शर्मिंदा या दूसरे बच्चों से कम नहीं समझना चाहिए।
- उसकी सीखने की जरूरत के अनुसार सहायता उपलब्ध कराने पर ध्यान देना चाहिए।
जल्दी पहचान होने का उद्देश्य बच्चे पर label लगाना नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर समय रहते सही सहायता उपलब्ध कराना है।
Screening के बाद क्या होगा?
अगर Part-1 और Part-2 screening के बाद किसी बच्चे को आगे assessment की जरूरत दिखाई देती है तो उसे संबंधित assessment प्रक्रिया के लिए refer किया जा सकता है।
PRASHAST portal में Intervention Camps, progress monitoring और outcome evaluation भी implementation cycle का हिस्सा हैं।
आवश्यकता और पात्रता के अनुसार आगे disability assessment और certification जैसी प्रक्रिया भी हो सकती है।
UDID क्या है और PRASHAST से इसका क्या संबंध है?
UDID यानी Unique Disability ID दिव्यांग व्यक्तियों के लिए सरकारी पहचान व्यवस्था है।
PRASHAST portal पर Student Support section में UDID Portal की जानकारी भी उपलब्ध कराई गई है, जहां पात्र व्यक्ति disability certificate और UDID Card के लिए संबंधित प्रक्रिया देख सकते हैं।
लेकिन PRASHAST screening होने का मतलब अपने आप UDID Card मिल जाना नहीं है।
इसके लिए निर्धारित assessment, certification और सरकारी प्रक्रिया अलग होती है।
PRASHAST कितनी भाषाओं में उपलब्ध है?
शिक्षा मंत्रालय की Annual Report के अनुसार PRASHAST checklist 23 भाषाओं में उपलब्ध कराई गई है। इनमें English के साथ संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल 22 भाषाएं शामिल हैं।
इसका उद्देश्य देश के अलग-अलग हिस्सों में teachers, special educators और school heads के लिए इसे आसानी से उपयोग करने योग्य बनाना है।
PRASHAST का फायदा क्या है?
PRASHAST का सबसे महत्वपूर्ण फायदा early screening यानी शुरुआती पहचान है।
कई disabilities या learning difficulties बाहर से साफ दिखाई नहीं देतीं।
अगर ऐसी जरूरतों को समय रहते पहचान लिया जाए तो बच्चे को उचित teaching support, assessment और दूसरी जरूरी सहायता जल्दी उपलब्ध कराई जा सकती है।
इससे बच्चे को बिना वजह “कमजोर”, “आलसी” या “पढ़ाई में खराब” समझने जैसी गलत धारणाओं को कम करने में भी मदद मिल सकती है। Official PRASHAST guidance भी unnecessary labelling से बचने पर जोर देती है।
PRASHAST का इस्तेमाल कौन कर सकता है?
PRASHAST की school-level implementation में मुख्य भूमिका:
Headmaster/Principal: School onboarding और implementation से जुड़े कार्य।
Regular Teacher: Part-1 में शुरुआती screening।
Special Educator: Part-2 में अधिक विस्तृत screening और validation।
इसके बाद जरूरत के अनुसार assessment और intervention से जुड़े professionals की भूमिका हो सकती है। Official portal पर इन भूमिकाओं के लिए अलग implementation guides भी उपलब्ध हैं।
क्या Parents खुद PRASHAST से बच्चे की Disability तय कर सकते हैं?
नहीं।
Parents को किसी checklist या बच्चे के कुछ व्यवहार देखकर स्वयं diagnosis नहीं करना चाहिए।
अगर बच्चे के सीखने, बोलने, सुनने, देखने, व्यवहार या विकास को लेकर चिंता है तो school teacher, special educator और आवश्यकता के अनुसार योग्य healthcare/development professional से सलाह लेना बेहतर है।
PRASHAST स्वयं भी preliminary screening tool है, final diagnostic test नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
PRASHAST App क्या है?
PRASHAST यानी Pre-Assessment Holistic Screening Tool स्कूल स्तर पर बच्चों में disability-related जरूरतों की शुरुआती screening में मदद करने वाला tool है। यह RPwD Act, 2016 में मान्यता प्राप्त 21 disability conditions को ध्यान में रखता है।
PRASHAST Part-1 Screening 2026 कब शुरू होगी?
Official PRASHAST portal के अनुसार 18 सितंबर 2026 से Part-1 Screening निर्धारित है।
Part-2 Screening कब होगी?
2026 timeline के अनुसार 2 अक्टूबर 2026 से Part-2 Screening निर्धारित है।
Part-1 Screening कौन करेगा?
Part-1 में regular teachers निर्धारित checklist के आधार पर विद्यार्थियों की शुरुआती screening करते हैं।
Part-2 कौन करेगा?
Part-2 में Special Educators, Part-1 observations को validate करने और आगे की जरूरत समझने में भूमिका निभाते हैं।
क्या PRASHAST Disability Certificate देता है?
नहीं। PRASHAST screening और शुरुआती पहचान में सहायता करता है। Disability की formal assessment और certification की अलग निर्धारित प्रक्रिया होती है।
क्या PRASHAST में Dyslexia की Screening हो सकती है?
PRASHAST 2.0 Specific Learning Disabilities से जुड़े शुरुआती संकेत पहचानने में सहायता करता है। शिक्षा मंत्रालय ने Dyslexia सहित SLDs की शुरुआती पहचान में इसकी भूमिका बताई है। लेकिन final diagnosis विशेषज्ञ assessment के आधार पर होना चाहिए।
निष्कर्ष
PRASHAST App का उद्देश्य स्कूलों में बच्चों को label करना नहीं, बल्कि उनकी विशेष जरूरतों को समय रहते पहचानने में सहायता करना है।
2026 में PRASHAST 2.0 के implementation को बड़े स्तर पर आगे बढ़ाया जा रहा है। Official timeline के अनुसार 18 सितंबर को Part-1 Screening, 2 अक्टूबर को Part-2 Screening, 20 अक्टूबर को Intervention Camps, 9 नवंबर को Progress & Monitoring और 25 दिसंबर 2026 तक Outcome Evaluation & Reporting निर्धारित है।
Parents और teachers के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि PRASHAST screening को medical diagnosis न समझें। किसी बच्चे में संभावित संकेत मिलने पर आगे उचित assessment और support की दिशा में काम किया जाना चाहिए।
Disclaimer
यह लेख 16 सितंबर 2026 तक उपलब्ध शिक्षा मंत्रालय, PRASHAST और NCERT की आधिकारिक जानकारी के आधार पर शैक्षिक और सामान्य जानकारी के लिए तैयार किया गया है। PRASHAST एक शुरुआती screening tool है, medical या clinical diagnosis का विकल्प नहीं। किसी बच्चे के स्वास्थ्य, विकास या disability से संबंधित अंतिम निर्णय के लिए संबंधित योग्य विशेषज्ञ और अधिकृत सरकारी प्रक्रिया की सहायता लें। Dates और implementation instructions बदल सकती हैं, इसलिए current जानकारी official portal पर जरूर जांचें।


