“दुनिया का एकलौता हिन्दू राष्ट्र, जिसका अपना संविधान और पासपोर्ट है पर ज़मीन नहीं!” कैैलासा

Kailasha
Source- Facebook

कैैलासा क्या है और इसका रहस्य कैसे शुरू हुआ?

‘कैैलासा’ (Kailaasa) का नाम सुनते ही लोगों के मन में पौराणिक कैलाश पर्वत की छवि उभरती है — भगवान शिव का निवास स्थान। लेकिन 2019 में यह नाम अचानक एक रहस्यमय “नए देश” के रूप में सामने आया। दावा किया गया कि यह दुनिया का पहला ‘हिंदू राष्ट्र’ है, जिसे स्वघोषित भगवान निध्यानंद ने स्थापित किया है। इस खबर ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया में हलचल मचा दी।

निध्यानंद: विवादों से घिरा ‘भगवान’

निध्यानंद (पूरा नाम: अरुद्रा निध्यानंद परमहंस) का जन्म 1 जनवरी 1978 को तिरुवन्नामलई, तमिलनाडु में हुआ था। बचपन से ही वे धार्मिक गतिविधियों में रुचि रखते थे और स्वयं को शिव का अवतार मानने लगे। उन्होंने 2000 के दशक की शुरुआत में बेंगलुरु के पास “निध्यानंद ध्यानपीठम आश्रम” की स्थापना की। जल्द ही वे टीवी चैनलों और सोशल मीडिया पर प्रसिद्ध हो गए।

परंतु प्रसिद्धि के साथ विवाद भी शुरू हो गए। 2010 में उनका एक आपत्तिजनक वीडियो सामने आया जिसमें वे एक अभिनेत्री के साथ कथित रूप से अनुचित स्थिति में दिखे। इस वीडियो के वायरल होने के बाद उन पर यौन शोषण के कई आरोप लगे। पुलिस ने उनके खिलाफ केस दर्ज किया, और उन्हें कई बार गिरफ्तार किया गया।

आरोपों की लिस्ट: एक के बाद एक विवाद

  • 2009: महिला भक्त ने यौन उत्पीड़न का केस दर्ज कराया।
  • 2010: अश्लील वीडियो वायरल — निध्यानंद ने इसे “मॉर्फ्ड” बताया।
  • 2012: अपहरण और बलात्कार के मामले में गिरफ्तारी।
  • 2017: चाइल्ड एब्यूज और ह्यूमन ट्रैफिकिंग के आरोप।
  • 2019: भारत छोड़कर फरार — इंटरपोल नोटिस जारी।

इन सबके बावजूद निध्यानंद ने खुद को “परमशिव का अवतार” कहकर प्रचारित किया और अपने अनुयायियों को ब्रह्मांड में नई सभ्यता बसाने के लिए प्रेरित किया। इसी विचार से ‘कैैलासा’ की नींव रखी गई।

कैैलासा की काल्पनिक नींव

2019 के अंत में निध्यानंद ने दावा किया कि उन्होंने दक्षिण अमेरिका में एक निर्जन द्वीप खरीदा है और वहां उन्होंने एक स्वतंत्र देश “कैैलासा” की स्थापना की है। उनकी आधिकारिक वेबसाइट www.kailaasa.org पर राष्ट्रपति, मंत्री, बैंकिंग सिस्टम और यहां तक कि पासपोर्ट जैसी सुविधाओं का उल्लेख किया गया।

इस साइट पर लिखा गया था कि ‘कैैलासा’ का उद्देश्य “सनातन हिंदू धर्म की रक्षा और प्रचार” है। इसमें यूनिवर्सल बेसिक इनकम, फ्री एजुकेशन और आध्यात्मिक नागरिकता जैसी योजनाओं का भी उल्लेख था।

कैैलासा की वास्तविकता: फर्जी दस्तावेज़ और सोशल मीडिया प्रोपेगेंडा

2020 में अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने जांच शुरू की तो सामने आया कि निध्यानंद द्वारा खरीदे गए द्वीप की कोई आधिकारिक मान्यता नहीं है। यहां तक कि बोलीविया और इक्वाडोर सरकारों ने ऐसे किसी भू-भाग की बिक्री से इंकार किया। असल में, वेबसाइट पर दिखाया गया द्वीप गूगल मैप की एक संपादित छवि निकला।

इसके बाद ‘कैैलासा’ ने सोशल मीडिया पर कई फर्जी प्रचार अभियान चलाए, जिनमें उन्होंने दावा किया कि संयुक्त राष्ट्र (UN) ने उन्हें बतौर “धार्मिक राष्ट्र” मान्यता दी है। लेकिन संयुक्त राष्ट्र ने इस दावे को झूठा बताया और कहा कि कैैलासा किसी भी तरह से मान्यता प्राप्त देश नहीं है।

न्यूआर्क (अमेरिका) विवाद – जब एक शहर बना ‘कैैलासा’ का शिकार

2023 में अमेरिका के न्यूआर्क सिटी ने ‘कैैलासा’ के प्रतिनिधियों के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते में “सांस्कृतिक और धार्मिक सहयोग” का उल्लेख था। बाद में जब जांच हुई तो पता चला कि न्यूआर्क प्रशासन को कैैलासा की वास्तविकता के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। जैसे ही यह खुलासा हुआ, न्यूआर्क सिटी ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी और अनुबंध को रद्द कर दिया।

इस घटना के बाद ‘कैैलासा फेक कंट्री स्कैम’ अंतरराष्ट्रीय मीडिया में छा गया। बीबीसी, सीएनएन, द गार्डियन और टाइम्स ऑफ इंडिया जैसे मीडिया हाउसों ने इस विषय पर रिपोर्ट प्रकाशित की।

निध्यानंद का डिजिटल साम्राज्य

निध्यानंद ने इंटरनेट का उपयोग अपने प्रचार के लिए बड़ी चतुराई से किया। उन्होंने यूट्यूब पर सैकड़ों वीडियो डाले, जिनमें वे विज्ञान, धर्म, और ब्रह्मांड पर अपने सिद्धांत बताते हैं। उनके अनुयायियों ने ऑनलाइन अभियानों के जरिए उन्हें “जीवित भगवान” के रूप में प्रचारित किया।

उन्होंने Kailaasa TV नाम का डिजिटल चैनल लॉन्च किया, जिसमें नियमित रूप से “राजकीय” समाचार और धार्मिक प्रवचन प्रसारित किए जाते हैं। कई विदेशी अनुयायियों को वर्चुअल नागरिकता भी दी गई, जिनसे कथित रूप से डोनेशन के नाम पर धन वसूला गया।

वित्तीय घोटाले और जांच एजेंसियां

भारतीय जांच एजेंसियों ने निध्यानंद और उनके ट्रस्टों के खिलाफ कई वित्तीय अनियमितताओं की जांच शुरू की। आरोप है कि उनके आश्रमों के माध्यम से विदेशों से करोड़ों रुपये का फंड आया, जिसे व्यक्तिगत लाभ के लिए उपयोग किया गया। कई पूर्व अनुयायियों ने बयान दिया कि निध्यानंद ने “धर्म के नाम पर भय और अंधभक्ति” फैलाकर लोगों से पैसा वसूला।

कैैलासा की वर्तमान स्थिति

2025 तक ‘कैैलासा’ किसी भी अंतरराष्ट्रीय संगठन द्वारा मान्यता प्राप्त देश नहीं है। फिर भी निध्यानंद के अनुयायी सोशल मीडिया पर सक्रिय हैं और विभिन्न देशों में उसके प्रचार कार्यालय चलाते हैं। कई देशों की सरकारों ने चेतावनी जारी की है कि ‘कैैलासा’ के प्रतिनिधि फर्जी पहचान और धार्मिक सहयोग के नाम पर धोखाधड़ी कर रहे हैं।

निध्यानंद का मनोविज्ञान और अनुयायियों पर असर

विशेषज्ञों का मानना है कि निध्यानंद का मामला केवल एक धार्मिक घोटाला नहीं बल्कि साइकोलॉजिकल मैनिपुलेशन का उदाहरण भी है। उन्होंने आध्यात्मिकता, भय और मुक्ति के नाम पर अनुयायियों को मानसिक रूप से नियंत्रित किया। कई लोगों ने बताया कि उन्हें आश्रम छोड़ने नहीं दिया जाता था और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता था।

कैैलासा का भविष्य और निष्कर्ष

‘कैैलासा फेक कंट्री स्कैम’ यह दिखाता है कि इंटरनेट युग में कैसे एक व्यक्ति सोशल मीडिया, फर्जी प्रचार और धार्मिक आस्था का उपयोग कर एक वैश्विक भ्रम पैदा कर सकता है। निध्यानंद का यह प्रयास एक चेतावनी है कि अंधभक्ति और डिजिटल प्रचार के युग में सत्य और असत्य के बीच की रेखा कितनी धुंधली हो चुकी है।

यह घोटाला न केवल धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ का मामला है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून, मीडिया साक्षरता और साइबर नैतिकता के लिए भी एक केस स्टडी बन चुका है।

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