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Student Mental Health Guidelines 2026: कॉलेजों और विश्वविद्यालयों की नई जिम्मेदारियाँ

Student Mental Health Guidelines 2026 के पालन को लेकर शिक्षा मंत्रालय ने कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और संबंधित शिक्षा नियामक संस्थाओं को महत्वपूर्ण निर्देश भेजे हैं। इनका उद्देश्य विद्यार्थियों के मानसिक, भावनात्मक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना है।

पढ़ाई और परीक्षा का दबाव, रोजगार की चिंता, आर्थिक परेशानी, रैगिंग, भेदभाव, अकेलापन तथा परिवार से दूर रहना विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। ऐसी स्थिति में केवल विद्यार्थी को मजबूत रहने की सलाह देना पर्याप्त नहीं है। शिक्षण संस्थान की भी जिम्मेदारी है कि वह समय पर सही सहायता उपलब्ध कराए।

सितंबर 2026 में भेजे गए सरकारी पत्रों में विद्यार्थी परामर्श, चौबीस घंटे सहायता, शिकायत निवारण, छात्रावास वाले संस्थानों में हर समय चिकित्सा सहायता तथा गंभीर घटनाओं की सूचना देने जैसे विषयों पर विशेष जोर दिया गया है।

आइए आसान हिंदी में जानते हैं कि इन दिशा-निर्देशों का विद्यार्थी, अभिभावक और शिक्षण संस्थान के लिए क्या अर्थ है।

Student Mental Health Guidelines 2026 क्या हैं?

ये किसी एक दिन बनाए गए पूरी तरह नए नियम नहीं हैं। इनमें सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश, राष्ट्रीय कार्यबल का काम, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी UGC के पहले से जारी दिशा-निर्देश और शिक्षा मंत्रालय द्वारा वर्ष 2026 में भेजे गए पालन संबंधी पत्र शामिल हैं।

विद्यार्थियों की मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं और उच्च शिक्षण संस्थानों में आत्महत्या की घटनाओं की रोकथाम के उपायों का अध्ययन करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर एक राष्ट्रीय कार्यबल बनाया गया है।

शिक्षा मंत्रालय ने 16 सितंबर 2026 को अलग-अलग शिक्षा नियामक संस्थाओं, केंद्र से सहायता प्राप्त संस्थानों और राज्यों के उच्च तथा तकनीकी शिक्षा विभागों को जरूरी निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए पत्र भेजे।

इनका उद्देश्य केवल किसी गंभीर घटना के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि परेशानी की जल्दी पहचान करना और समय पर सहायता उपलब्ध कराना है।

किन शिक्षण संस्थानों पर ये निर्देश लागू हो सकते हैं?

ये निर्देश मुख्य रूप से उच्च शिक्षण संस्थानों से संबंधित हैं। इनमें परिस्थितियों और लागू नियमों के अनुसार निम्न संस्थान शामिल हो सकते हैं:

  • विश्वविद्यालय
  • महाविद्यालय
  • IIT
  • IIM
  • NIT
  • IIIT
  • चिकित्सा महाविद्यालय
  • अभियांत्रिकी महाविद्यालय
  • अन्य उच्च एवं तकनीकी शिक्षण संस्थान
  • छात्रावास वाले शिक्षण संस्थान

संस्थान के प्रकार और उससे संबंधित नियामक संस्था के आधार पर व्यवस्था में अंतर हो सकता है।

कॉलेज और विश्वविद्यालयों की प्रमुख जिम्मेदारियाँ

1. समान मानसिक स्वास्थ्य नीति लागू करना

सरकारी पत्र में सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण से जुड़ी समान नीति लागू करने पर जोर दिया गया है।

यह नीति केवल कागज पर नहीं होनी चाहिए। विद्यार्थी को स्पष्ट रूप से पता होना चाहिए कि:

  • सहायता कहाँ मिलेगी।
  • परामर्शदाता से कैसे संपर्क करना है।
  • शिकायत किस अधिकारी को देनी है।
  • आपात स्थिति में किस नंबर पर संपर्क करना है।
  • उसकी जानकारी कितनी गोपनीय रखी जाएगी।

यह जानकारी संस्थान की वेबसाइट, विद्यार्थी पोर्टल, सूचना-पट्ट, छात्रावास और प्रवेश के समय होने वाले परिचय कार्यक्रम में दी जानी चाहिए।

2. परामर्श सेवा उपलब्ध कराना

विद्यार्थियों को प्रशिक्षित परामर्शदाता या योग्य मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बात करने की सुविधा मिलनी चाहिए।

परामर्श सेवा ऐसी होनी चाहिए:

  • आसानी से उपलब्ध हो।
  • विद्यार्थी की गोपनीयता का सम्मान करे।
  • विद्यार्थी को अपमानित या बदनाम न करे।
  • उसकी भाषा और विशेष जरूरतों को समझे।
  • जरूरत होने पर विशेषज्ञ चिकित्सक तक पहुँचने में सहायता करे।
  • संभव होने पर ऑनलाइन और आमने-सामने दोनों विकल्प दे।

परामर्श केवल बहुत गंभीर परेशानी होने पर नहीं लिया जाता। पढ़ाई का तनाव, नींद की समस्या, घर की याद, मित्रता या संबंधों की परेशानी और भविष्य की चिंता में भी सहायता ली जा सकती है।

3. परेशानी की जल्दी पहचान करना

शिक्षकों, छात्रावास कर्मचारियों और विद्यार्थी कल्याण से जुड़े कर्मचारियों को विद्यार्थियों की परेशानी के संकेत समझने के लिए प्रशिक्षित किया जाना चाहिए।

कुछ संभावित संकेत हो सकते हैं:

  • अचानक लगातार कक्षा में अनुपस्थित रहना
  • पढ़ाई में तेज गिरावट
  • सब लोगों से अलग रहने लगना
  • नींद या व्यवहार में बड़ा बदलाव
  • बार-बार निराशा व्यक्त करना
  • सामान्य गतिविधियों में रुचि कम होना

ये संकेत किसी मानसिक बीमारी का निश्चित प्रमाण नहीं हैं। इनका उद्देश्य विद्यार्थी को बीमारी का नाम देना नहीं, बल्कि संवेदनशीलता के साथ उससे बातचीत शुरू करना है।

4. विद्यार्थी सहायता समूह बनाना

UGC के दिशा-निर्देश सकारात्मक और सहायक विद्यार्थी समूह बनाने पर जोर देते हैं।

शिक्षण संस्थान निम्न सुविधाएँ उपलब्ध करा सकते हैं:

  • विद्यार्थी सहायता समूह
  • शिक्षक मार्गदर्शक
  • विद्यार्थी कल्याण समिति
  • परामर्श केंद्र
  • नियमित स्वास्थ्य एवं कल्याण कार्यक्रम
  • खेल और शारीरिक गतिविधियाँ
  • नए विद्यार्थियों के लिए परिचय कार्यक्रम
  • छात्रावास सहायता व्यवस्था
  • रोजगार और भविष्य संबंधी मार्गदर्शन
  • आर्थिक सहायता की जानकारी

किसी विद्यार्थी स्वयंसेवक को प्रशिक्षित परामर्शदाता का विकल्प नहीं बनाया जाना चाहिए। वह परेशान विद्यार्थी की बात सुनकर उसे सही सहायता तक पहुँचाने में मदद कर सकता है।

5. रैगिंग और भेदभाव की सुरक्षित शिकायत

रैगिंग तथा जाति, लिंग, भाषा, क्षेत्र, धर्म, दिव्यांगता या आर्थिक स्थिति के आधार पर भेदभाव विद्यार्थी के मानसिक स्वास्थ्य को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है।

कॉलेज और विश्वविद्यालय में सुरक्षित शिकायत व्यवस्था होनी चाहिए। विद्यार्थी को बिना डर अपनी शिकायत दर्ज कराने का अवसर मिलना चाहिए।

शिकायत करने के बाद बदले की कार्रवाई से बचाने की व्यवस्था भी जरूरी है।

शिकायत करते समय विद्यार्थी को निम्न प्रमाण सुरक्षित रखने चाहिए:

  • शिकायत की प्रति
  • ईमेल
  • शिकायत संख्या
  • संबंधित संदेश
  • उपलब्ध तस्वीर या दस्तावेज
  • संस्थान से मिला उत्तर

अपराध या तत्काल खतरे की स्थिति में केवल संस्थान की आंतरिक समिति पर निर्भर न रहें। पुलिस या संबंधित कानूनी प्राधिकरण से भी संपर्क करें।

6. पढ़ाई का अनावश्यक दबाव कम करना

केवल परामर्श कक्ष बना देना पर्याप्त नहीं है। संस्थान को अपनी पढ़ाई और परीक्षा व्यवस्था की भी समय-समय पर समीक्षा करनी चाहिए।

इसमें निम्न बातें शामिल हो सकती हैं:

  • परीक्षा और गृहकार्य का अत्यधिक दबाव
  • परीक्षा परिणाम बताने का तरीका
  • असफल विद्यार्थी का अपमान
  • उपस्थिति से जुड़ी कठिन परिस्थितियाँ
  • कमजोर विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त कक्षाएँ
  • दोबारा परीक्षा की स्पष्ट जानकारी
  • भविष्य और रोजगार से जुड़ा मार्गदर्शन
  • शिक्षकों का व्यवहार
  • विद्यार्थियों के बीच अस्वस्थ तुलना

विद्यार्थी सहायता का अर्थ पढ़ाई के स्तर को कम करना नहीं है। इसका अर्थ पढ़ाई की व्यवस्था को पारदर्शी और मानवीय बनाना है।

7. चौबीस घंटे सहायता नंबर की जानकारी

कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध चौबीस घंटे के राष्ट्रीय सहायता नंबर प्रमुख स्थानों पर दिखाने चाहिए।

यह जानकारी निम्न स्थानों पर लगाई जा सकती है:

  • संस्थान की वेबसाइट
  • विद्यार्थी पोर्टल
  • छात्रावास का सूचना-पट्ट
  • पुस्तकालय
  • परीक्षा विभाग
  • परिसर के चिकित्सा केंद्र
  • विद्यार्थी पुस्तिका
  • परामर्श केंद्र
  • अन्य सामान्य स्थान

विद्यार्थियों को यह भी बताया जाना चाहिए कि किस परिस्थिति में किस सहायता नंबर का उपयोग करना है।

8. छात्रावास वाले संस्थानों में चौबीस घंटे चिकित्सा सहायता

शिक्षा मंत्रालय के सितंबर 2026 के पत्र में आवासीय सुविधा वाले सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों के लिए चौबीस घंटे चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करने को कहा गया है।

संस्थान की व्यवस्था के अनुसार इसमें निम्न सुविधाएँ शामिल हो सकती हैं:

  • परिसर में चिकित्सा केंद्र
  • हर समय उपलब्ध चिकित्सा कर्मचारी
  • नजदीकी अस्पताल से समझौता
  • एम्बुलेंस की व्यवस्था
  • आपात सहायता नंबर
  • रात में चिकित्सा सहायता की स्पष्ट प्रक्रिया

प्रत्येक विद्यार्थी को प्रवेश के समय चिकित्सा केंद्र का स्थान और आपात नंबर बताया जाना चाहिए।

9. छात्रवृत्ति समय पर देना

सरकारी पत्र में छात्रवृत्ति के आवेदन, सत्यापन, प्रक्रिया और भुगतान को तय समय में पूरा करने पर भी जोर दिया गया है।

छात्रवृत्ति में देरी से विद्यार्थी पर आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ सकता है। इसलिए संस्थान को आवेदन का सत्यापन अंतिम समय तक रोककर नहीं रखना चाहिए।

विद्यार्थी को आवेदन की रसीद, सत्यापन की स्थिति और शिकायत अधिकारी की जानकारी सुरक्षित रखनी चाहिए।

विद्यालय स्तर की एक प्रमुख छात्रवृत्ति की जानकारी के लिए NMMSS Scholarship 2026-27 पढ़ सकते हैं।

10. खाली शिक्षक और कर्मचारी पद भरना

शिक्षा मंत्रालय ने शिक्षकों और अन्य कर्मचारियों के खाली पदों को तय समय में भरने पर भी जोर दिया है।

पर्याप्त कर्मचारी होने से:

  • विद्यार्थियों को सही मार्गदर्शन मिल सकता है।
  • शिकायतों का समय पर समाधान हो सकता है।
  • पढ़ाई का प्रबंधन बेहतर हो सकता है।
  • परामर्श और सहायता व्यवस्था मजबूत हो सकती है।
  • छात्रावास की देखरेख बेहतर हो सकती है।

11. गंभीर घटना की तुरंत सूचना देना

किसी विद्यार्थी की आत्महत्या या अप्राकृतिक मृत्यु की जानकारी मिलने पर शिक्षण संस्थान को तुरंत पुलिस को सूचना देनी होगी।

यह निर्देश तब भी लागू होगा जब घटना:

  • परिसर में हुई हो
  • छात्रावास में हुई हो
  • निजी आवास या PG में हुई हो
  • शिक्षण संस्थान के बाहर हुई हो

ऐसी घटनाओं की वार्षिक जानकारी UGC अथवा संबंधित नियामक संस्था को देने का निर्देश भी शामिल है।

संस्थान को घटना की जानकारी देते समय विद्यार्थी और उसके परिवार की गरिमा तथा गोपनीयता का सम्मान करना चाहिए। अपुष्ट कारण, निजी बातचीत, तस्वीर या संवेदनशील जानकारी सार्वजनिक नहीं करनी चाहिए।

विद्यार्थी सहायता कैसे माँग सकता है?

अगर आप लगातार तनाव, डर, उदासी, अकेलापन या पढ़ाई के दबाव से परेशान हैं, तो सहायता माँगना कमजोरी नहीं है।

आप इन कदमों से शुरुआत कर सकते हैं:

  1. किसी भरोसेमंद मित्र या परिवार के सदस्य से बात करें।
  2. कॉलेज के परामर्शदाता से संपर्क करें।
  3. विद्यार्थी कल्याण विभाग में सहायता माँगें।
  4. शिक्षक मार्गदर्शक या छात्रावास प्रभारी को अपनी परेशानी बताएँ।
  5. परिसर के चिकित्सा केंद्र की जानकारी लें।
  6. सहायता न मिलने पर शिकायत अधिकारी को लिखित पत्र या ईमेल भेजें।
  7. जरूरत होने पर संस्थान के बाहर किसी योग्य मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से मिलें।
  8. तत्काल संकट में आपात सेवा या नजदीकी अस्पताल से सहायता लें।

पहली बातचीत में पूरी समस्या बताना जरूरी नहीं है। आप इतना कहकर शुरुआत कर सकते हैं:

“मैं कुछ समय से बहुत दबाव महसूस कर रहा/रही हूँ और किसी योग्य परामर्शदाता से गोपनीय रूप से बात करना चाहता/चाहती हूँ।”

Tele-MANAS से सहायता कैसे प्राप्त करें?

Tele-MANAS भारत सरकार की चौबीस घंटे उपलब्ध दूरभाष मानसिक स्वास्थ्य सहायता सेवा है।

संपर्क नंबर:

  • 14416
  • 1800-89-14416

इन नंबरों पर मानसिक स्वास्थ्य परामर्श और जरूरत के अनुसार आगे की सहायता से जुड़ी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

यदि किसी व्यक्ति को तत्काल शारीरिक खतरा है या तुरंत चिकित्सा सहायता चाहिए, तो केवल दूरभाष परामर्श पर निर्भर न रहें। 112, स्थानीय आपात सेवा या नजदीकी अस्पताल से तुरंत संपर्क करें।

माता-पिता विद्यार्थी की सहायता कैसे करें?

विद्यार्थी को केवल “पढ़ाई पर ध्यान दो” या “सबको परेशानी होती है” कहना उसकी समस्या का समाधान नहीं है।

अभिभावक ये कदम उठा सकते हैं:

  • उसकी बात बिना टोके सुनें।
  • तुरंत दोष न दें।
  • दूसरे बच्चों से तुलना न करें।
  • अंक से पहले स्वास्थ्य की चिंता करें।
  • परामर्शदाता से मिलने के लिए प्रोत्साहित करें।
  • परेशानी को बहाना न कहें।
  • नींद, भोजन और व्यवहार में बदलाव पर ध्यान दें।
  • संस्थान से सहायता माँगें।
  • विद्यार्थी की गोपनीयता का सम्मान करें।
  • गंभीर चिंता में विशेषज्ञ की सहायता लेने में देर न करें।

यदि विद्यार्थी सहायता लेने से डरता है, तो उसके साथ फोन करने या परामर्शदाता के पास जाने का प्रस्ताव दें।

किसी परेशान मित्र की सहायता कैसे करें?

यदि किसी मित्र के व्यवहार में बड़ा बदलाव दिखाई दे, तो शांत और सुरक्षित स्थान पर उससे बात करें।

आप कह सकते हैं:

“मैंने देखा है कि तुम कुछ दिनों से परेशान लग रहे हो। मैं तुम्हारी बात सुनने के लिए यहाँ हूँ।”

ये बातें कहने से बचें:

  • “इतना मत सोचो।”
  • “यह कोई बड़ी समस्या नहीं है।”
  • “दूसरे लोग तुमसे अधिक परेशान हैं।”
  • “तुम केवल ध्यान चाहते हो।”

यदि मित्र अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त करता है, तो अकेले स्थिति संभालने की कोशिश न करें। किसी भरोसेमंद वयस्क, परामर्शदाता, परिवार, चिकित्सा विशेषज्ञ या आपात सेवा को तुरंत शामिल करें।

परामर्श में गोपनीयता का क्या अर्थ है?

विद्यार्थी की निजी जानकारी का सम्मान किया जाना चाहिए। उसे पहले बताया जाना चाहिए कि बातचीत की जानकारी कैसे सुरक्षित रखी जाएगी और किन विशेष परिस्थितियों में सुरक्षा के लिए किसी अन्य जिम्मेदार व्यक्ति को सूचना देना आवश्यक हो सकता है।

परामर्श से पहले ये प्रश्न पूछे जा सकते हैं:

  • क्या बातचीत गोपनीय रहेगी?
  • लिखित जानकारी कौन देख सकता है?
  • शिक्षक को क्या बताया जाएगा?
  • आपात स्थिति में क्या प्रक्रिया होगी?
  • क्या दूरभाष या ऑनलाइन परामर्श उपलब्ध है?
  • परामर्शदाता की योग्यता क्या है?

तत्काल खतरे की स्थिति में विद्यार्थी की सुरक्षा के लिए किसी जिम्मेदार व्यक्ति या सेवा को सूचना देना आवश्यक हो सकता है।

अच्छी विद्यार्थी सहायता व्यवस्था की पहचान

एक जिम्मेदार शिक्षण संस्थान में निम्न सुविधाएँ हो सकती हैं:

  • परामर्शदाता की स्पष्ट संपर्क जानकारी
  • मिलने का समय लेने की आसान प्रक्रिया
  • आपात सहायता नंबर
  • चौबीस घंटे चिकित्सा सहायता
  • रैगिंग-विरोधी समिति
  • शिकायत निवारण समिति
  • दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए सुविधाएँ
  • छात्रवृत्ति शिकायत व्यवस्था
  • शिक्षक मार्गदर्शक
  • विद्यार्थी परिचय कार्यक्रम
  • गोपनीयता संबंधी नीति
  • विशेषज्ञ के पास भेजने की व्यवस्था
  • सुविधाओं की नियमित समीक्षा

केवल वर्ष में एक बार मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम आयोजित कर देना पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।

इन दिशा-निर्देशों से क्या बदल सकता है?

दिशा-निर्देशों का वास्तविक लाभ उनके सही पालन पर निर्भर करेगा।

ठीक प्रकार से पालन होने पर:

  • विद्यार्थियों को जल्दी सहायता मिल सकती है।
  • परामर्श लेने को लेकर डर कम हो सकता है।
  • परिसर में सहायता व्यवस्था स्पष्ट हो सकती है।
  • छात्रवृत्ति और शिकायत में देरी कम हो सकती है।
  • गंभीर घटनाओं की सूचना अधिक पारदर्शी हो सकती है।
  • छात्रावास वाले संस्थानों की चिकित्सा तैयारी बेहतर हो सकती है।
  • शिक्षक विद्यार्थी की परेशानी जल्दी पहचान सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Student Mental Health Guidelines 2026 किनके लिए हैं?

ये मुख्य रूप से उच्च शिक्षण संस्थानों, शिक्षा नियामक संस्थाओं, राज्यों के उच्च शिक्षा विभागों और केंद्र से सहायता प्राप्त संस्थानों से जुड़े निर्देश हैं।

क्या प्रत्येक कॉलेज में परामर्शदाता होना चाहिए?

UGC और शिक्षा मंत्रालय की व्यवस्था विद्यार्थियों को परामर्श तथा सहायता उपलब्ध कराने पर जोर देती है। इसकी वास्तविक व्यवस्था संस्थान और लागू नियमों के अनुसार अलग हो सकती है।

छात्रावास वाले कॉलेज में चौबीस घंटे चिकित्सा सहायता जरूरी है?

शिक्षा मंत्रालय के सितंबर 2026 के पत्र में आवासीय सुविधा वाले उच्च शिक्षण संस्थानों में चौबीस घंटे चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करने को कहा गया है।

Tele-MANAS का नंबर क्या है?

Tele-MANAS सहायता के लिए 14416 या 1800-89-14416 पर संपर्क किया जा सकता है।

रैगिंग या भेदभाव की शिकायत कहाँ करें?

संस्थान की रैगिंग-विरोधी समिति, शिकायत निवारण समिति या विद्यार्थी कल्याण विभाग में शिकायत करें। तत्काल खतरे या अपराध की स्थिति में पुलिस से संपर्क करें।

छात्रवृत्ति में देरी होने पर क्या करें?

अपने आवेदन की रसीद और स्थिति सुरक्षित रखें। संस्थान के छात्रवृत्ति अधिकारी और शिकायत निवारण विभाग में लिखित शिकायत दें।

तत्काल आपात स्थिति में क्या करें?

व्यक्ति को अकेला न छोड़ें। 112, स्थानीय आपात सेवा, परिसर के चिकित्सा दल या नजदीकी अस्पताल से तुरंत संपर्क करें।

निष्कर्ष

Student Mental Health Guidelines 2026 का मुख्य संदेश है कि विद्यार्थी का मानसिक स्वास्थ्य केवल उसकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं है। कॉलेज और विश्वविद्यालय को परामर्श, चिकित्सा सहायता, सुरक्षित शिकायत व्यवस्था, समय पर छात्रवृत्ति और सहयोगपूर्ण परिसर उपलब्ध कराना होगा।

विद्यार्थी को परेशानी बहुत गंभीर होने तक सहायता का इंतजार नहीं करना चाहिए। पढ़ाई का दबाव, अकेलापन या भावनात्मक परेशानी होने पर परामर्शदाता, भरोसेमंद व्यक्ति या Tele-MANAS से बात की जा सकती है।

समय पर सहायता लेना कमजोरी नहीं, बल्कि अपने स्वास्थ्य की देखभाल का जिम्मेदार कदम है।

जरूरी सहायता: भारत में चौबीस घंटे Tele-MANAS सेवा के लिए 14416 या 1800-89-14416 पर संपर्क करें। तत्काल खतरे या चिकित्सा आपात स्थिति में 112 अथवा नजदीकी अस्पताल से सहायता लें।

अस्वीकरण: यह लेख सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यह मानसिक स्वास्थ्य की जाँच, परामर्श या उपचार का विकल्प नहीं है। प्रत्येक व्यक्ति की स्थिति अलग हो सकती है। परेशानी होने पर योग्य मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ, चिकित्सक या सरकारी सहायता सेवा से संपर्क करें। TaraTimes किसी सरकारी संस्था या चिकित्सा सेवा से संबद्ध नहीं है।

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